इटावा। देश की प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्था राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की संकाय भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। समाजसेवी प्रेम कुमार शाक्य ने इस पूरी प्रक्रिया पर प्रश्न खड़े करते हुए पारदर्शिता को लेकर गहरी चिंता जताई है।
एनसीईआरटी द्वारा वर्ष 2020 के बाद लगातार तीन बार जारी भर्ती विज्ञापन में अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा दिव्यांग श्रेणी के अनेक पदों पर साक्षात्कार होने के बावजूद अभ्यर्थियों को उपयुक्त नहीं पाया गया। जबकि साक्षात्कार के लिए केवल वही अभ्यर्थी बुलाए जाते हैं जो प्रारंभिक जांच में पूरी तरह योग्य पाए जाते हैं। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि जब अभ्यर्थी योग्यता के आधार पर साक्षात्कार तक पहुंचे,तो फिर एक साथ इतने लोगों को “उपयुक्त नहीं” कैसे घोषित कर दिया गया। यदि योग्य और अनुभवी अभ्यर्थियों को बार-बार इस प्रकार अयोग्य बताया जाता है तो चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
समाजसेवी श्री शाक्य ने पूछा है कि अभ्यर्थियों को “उपयुक्त नहीं पाया गया” घोषित करने के लिए परिषद द्वारा कौन-से लिखित मानदंड निर्धारित किए गए हैं तथा चयन समिति ने किन आधारों पर यह निर्णय लिया। यह भी पूछा है कि क्या इस विषय से संबंधित उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों जैसे दिल्ली उच्च न्यायालय तथा अन्य न्यायिक टिप्पणियों का अध्ययन परिषद द्वारा किया गया है या नहीं। साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि क्या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा संस्थानों को “उपयुक्त नहीं” घोषित करने के मामलों में विस्तृत औचित्य रिपोर्ट प्रस्तुत करने संबंधी दिशा-निर्देशों पर एनसीईआरटी ने कोई विचार किया है।
इसके अतिरिक्त हाल ही में जारी भर्ती विज्ञापन संख्या 177 के संदर्भ में भी यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या आगामी चयन प्रक्रियाओं में भी अभ्यर्थियों को इसी प्रकार “उपयुक्त नहीं” घोषित किया जाएगा या इसके लिए कोई पारदर्शी और स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है।
श्री शाक्य ने छ: माह पूर्व भी भर्ती के दौरान महामहिम राष्ट्रपति से उच्चस्तरीय जांच व योग्य अभ्यर्थियों को न्याय की मांग की थी। अब एनसीईआरटी की जन सूचना अधिकारी इंद्राणी भादुड़ी को ई-मेल व डाक द्वारा प्रेषित पत्र के माध्यम से आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी हैं।
एनसीईआरटी की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल:प्रेम शाक्य
