सैफई,इटावा। उत्तर प्रदेश के आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई ने एक और महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार एक ही सर्जिकल सत्र में लैप्रोस्कोपिक विधि से तिल्ली (स्प्लीन) एवं पित्ताशय (गॉलब्लैडर) की सफल सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में नया आयाम स्थापित किया है।
यह जटिल एवं चुनौतीपूर्ण सर्जरी फिरोजाबाद निवासी 40 वर्षीय महिला,पूजा देवी,का सफल ऑपरेशन किया गया।
मरीज लंबे समय से लगभग 2 किलो ग्राम वज़न की अत्यधिक बढ़ी हुई तिल्ली (स्प्लीनोमेगाली) के कारण गंभीर एनीमिया (खून की कमी) एवं प्लेटलेट्स की कमी (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) से पीड़ित थीं। साथ ही पित्ताशय में पथरी के कारण उन्हें बार-बार तीव्र पेट दर्द की समस्या भी हो रही थी।
सर्जरी का नेतृत्व वरिष्ठ सर्जन डॉ.एस.पी.सिंह एवं डॉ.विपिन गुप्ता व डॉ.राम लखन ने किया,जबकि एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ.विक्रम सिंह व डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कुशलता पूर्वक निभाई। संपूर्ण ऑपरेशन केवल 5-10 मिमी आकार के चार छोटे चीरे टुकड़े (पोर्ट्स) के माध्यम से,बिना बड़ा चीरा लगाए,लैप्रोस्कोपिक तकनीक से एक ही सत्र में संपन्न किया गया।
ऑपरेशन के दौरान लगभग 2 किलो ग्राम वज़न की अत्यधिक बढ़ी हुई तिल्ली को सुरक्षित रूप से निकाला गया,जिससे मरीज की रक्त एवं प्लेटलेट संबंधी समस्या में तत्काल सुधार हुआ। साथ ही पथरीयुक्त पित्ताशय को भी सफलतापूर्वक हटाया गया, जिससे उन्हें लंबे समय से हो रहे पेट दर्द से स्थायी राहत मिली।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के कारण मरीज को कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव,शीघ्र रिकवरी एवं कम अस्पताल प्रवास का लाभ मिला। वर्तमान में मरीज की स्थिति पूर्णतः संतोषजनक है और वे तेजी से स्वस्थ हो रही हैं।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर यूपीयूएमएस के कुलपति प्रो.डॉ.अजय सिंह ने पूरी चिकित्सा टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की उन्नत सर्जिकल क्षमता, टीमवर्क एवं मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। उन्होंने इसे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया।
यह उपलब्धि पुनः सिद्ध करती है कि यूपीयूएमएस सैफई जटिल एवं आधुनिक सर्जिकल उपचारों के लिए एक विश्वसनीय एवं अग्रणी चिकित्सा केंद्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है तथा प्रदेश एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
