सैफई (इटावा)।उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के मानसिक रोग विभाग में भर्ती अज्ञात महिला से दुष्कर्म का जघन्य मामला सामने आया है। करीब 19 सप्ताह (पांच माह) की गर्भवती पाए जाने के बाद पूरे प्रकरण का खुलासा हुआ। पुलिस ने नामजद आरोपित सफाई कर्मी को गिरफ्तार कर लिया है।
मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण कुमार मिश्रा द्वारा बुधवार की देर रात दर्ज कराए गए मुकदमे में बताया गया है कि 14 जून 2025 को करीब 38 वर्षीय अज्ञात महिला को विभाग के वार्ड में भर्ती कराया गया था। महिला बोलने, सुनने व समझने में अक्षम है और लंबे समय से उपचाराधीन है। ऐसे में उसकी सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी पूरी तरह संस्थान पर थी।
17 मार्च 2026 को हुए रूटीन चेकअप में महिला के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई, लेकिन इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया आखिर करीब पांच माह तक उसके साथ दुष्कर्म होता रहा और इसकी भनक तक किसी को क्यों नहीं लगी? क्या इतने लंबे समय तक कोई नियमित चिकित्सकीय परीक्षण नहीं हुआ, या फिर निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय रहा?
सूत्रों के अनुसार, विभाग में भर्ती एक अन्य महिला ने कथित तौर पर घटना को देखा और अन्य मरीजों के बीच इसका जिक्र किया। वार्ड में चर्चा फैलने के बाद मामला स्टाफ तक पहुंचा, जिसके बाद पूरा प्रकरण सामने आया। मामला उजागर होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और संबंधित वार्ड में तैनात स्टाफ को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। करीब एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को हटाकर अन्य स्थानों पर तैनात किया गया है। साथ ही पूरे मामले की आंतरिक जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।
जांच में सामने आया है कि विश्वविद्यालय में सफाई कार्य देख रही फर्म सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के अधीन कार्यरत सफाई कर्मी रविंद्र कुमार बाल्मिक 42 पुत्र कन्हैयालाल, निवासी लखना थाना बकेवर, जिला इटावा द्वारा महिला के साथ शारीरिक शोषण कर दुष्कर्म किया गया।

मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना सैफई प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र राठी की टीम ने आरोपित को अमरसीपुर बंबा की पुलिया के पास से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद गुरुवार को सीओ सैफई केपी सिंह एवं प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र राठी के नेतृत्व में पुलिस टीम फोरेंसिक टीम के साथ मानसिक रोग विभाग पहुंची। टीम ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य व नमूने एकत्र किए, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। वार्डों में सीसीटीवी कैमरे, एवं पूर्व सैनिक सुरक्षा गार्ड तैनात होने के बावजूद इस तरह की वारदात का लंबे समय तक सामने न आना निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। कैमरों की नियमित मॉनिटरिंग, रिकॉर्डिंग की समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका अब जांच के घेरे में है।
एक और बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस घटना में केवल एक कर्मचारी ही शामिल है या इसके पीछे कोई और भी है। पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से खंगाल रही है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि मानसिक रोग विभाग में पूर्व में भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ प्रकरण थाना स्तर तक पहुंचे, लेकिन बाद में समझौते के जरिए उन्हें दबा दिया गया। ऐसे में यह मामला पुराने घटनाक्रमों को भी उजागर कर रहा है।
सीओ केपी सिंह ने बताया कि घटना अत्यंत गंभीर है और हर पहलू की जांच की जा रही है। अस्पताल परिसर में तैनात कर्मचारियों, ड्यूटी चार्ट और अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रोफेसर सोमेंद्र पाल सिंह ने बताया कि मामले की जांच के लिए कुलपति प्रोफेसर डॉ अजय सिंह के निर्देशन पर 9 सदस्यों की कमेटी गठित कर दी गई है। और 48 घंटे मे जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
