इटावा। सर मदनलाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, इटावा में आज बुधवार को “वायु प्रदूषण : युवा पीढ़ी के लिए बड़ी चुनौती” विषय पर सेमिनार कालेज के छात्र छात्राओं के लिए आयोजित किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में विश्व के 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शुमार भारत के जाने माने फेंफड़ों के विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. सूर्य कान्त,प्रोफेसर एंड हेड रेस्पिरेट्री मेडिसिन डिपार्टमेंट, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ, नेशनल कोर कमेटी सदस्य, डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभांरभ मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन से हुई तत्पश्चात डायरेक्टर, डॉ उमाशंकर शर्मा एवं उनके सहयोगी स्टाफ ने प्रोफेसर डॉ सूर्य कान्त का माल्यार्पण और बुके देकर स्वागत किया।
डॉ. सूर्य कान्त ने अपने संबोधन में जनपद के शिक्षाविद स्व0 मदनलाल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हमेशा शिक्षा जगत के उन्नयन के लिए समर्पित रहे मदनलाल जी जैसी महान दिव्यात्मा को मै सादर नमन करता हूं।
उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि, जीवन के लिए हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन दोनों बेहद आवश्यक हैं, किंतु यदि हम प्रदूषित वायु में लगातार सांस लेते रहते हैं तब यही प्रदूषित ऑक्सीजन हमारी रक्त वाहिकाओं के माध्यम से शरीर के विभिन्न वाइटल ऑर्गन तक पहुँचकर अनेक गंभीर बीमारियों को जन्म दे देती है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण से निमोनिया, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) तथा फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है। पैसिव स्मोकिंग (परोक्ष धूम्रपान) के खतरों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि, सिगरेट का केवल 30% धुआं पीने वाला व्यक्ति अपने अंदर लेता है जबकि, शेष 70% धुंआ वह अपने आसपास के लोगों के फेफड़ों को गिफ्ट में दे देता है, सिगरेट के धुएं से फेफड़े के 40 प्रकार के कैंसर होते है।
डॉ. सूर्य कान्त ने बताया कि वायु प्रदूषण युवा पीढ़ी के लिए बहुत हानिकारक है, जिससे कुपोषण, मोटापा और विकास अवरोध (स्टंटिंग) जैसी गंभीर स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। साथ ही गर्भवती महिलाओं में गर्भ के अंदर पल रहे शिशु के विकास का रुक जाना (IUGR) तथा जन्मजात बीमारियाँ और संक्रमण जैसी गंभीर समस्याएँ वायु प्रदूषण से ही होती हैं।
उन्होंने कहा कि खुले में कचरा जलाना,औद्योगिक धुआँ, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल, वाहन का धुंआ ,घरों में लकड़ी या कोयला जलाना आदि प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने कालेज के स्थानीय शिक्षकों,छात्र छात्राओं और सभी कर्मचारियों से हमेशा साइकिल से ही कॉलेज आने की अपील की साथ ही अपनी संस्था ओशन के माध्यम से तुलसी के पौधों को कॉलेज परिसर में लगवाने और एक तुलसी पार्क बनाने का भी आवाह्न किया।
सेमिनार के प्रश्न काल में बच्चों ने उनसे श्वांस रोग और फेंफड़ों की बीमारियों से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे,उन्होंने बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए छात्र जीवन में हमेशा ही कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा दी।
इसी क्रम में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए समर्पित संस्था (ओशन) के अध्यक्ष डॉ. सूर्य कान्त ने अपने प्रेरक संदेश में बच्चों से कहा कि जीवन में अपनी मातृ भूमि की जड़ों और संस्कारों को कभी भी मत भूलना, वे भी आज तक अपने इटावा और अपने पूर्व विद्यालय से दिल से जुड़े हुए है और अपनी मातृभूमि का यही प्रेम उन्हें यहां बार बार खींच ले आता है।
इस अवसर पर संस्था ओशन के महासचिव वन्यजीव विशेषज्ञ सर्पमित्र डॉ आशीष त्रिपाठी,एवं डिस्ट्रिक कॉर्डिनेटर डॉ पीयूष दीक्षित भी उपस्थित रहे। व्याख्यान के उपरान्त उन्होंने मदन हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ विकास यादव से भी मदन हॉस्पिटल में जाकर शिष्टाचार मुलाकात की ।
एसएमजीआई के चेयरमैन डॉ विवेक यादव ने प्रोफेसर डॉ सूर्यकान्त का कॉलेज आगमन और छात्र छात्राओं के ज्ञानवर्धन के लिए दिए गए महत्वपूर्ण व्याख्यान के लिए हार्दिक आभार प्रकट किया।
अंत में डायरेक्टर डॉ उमाशंकर शर्मा ने डॉ. सूर्य कान्त का कॉलेज आगमन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ साहब के महत्वपूर्ण सुझावों से हम सभी को वायु प्रदूषण को कम करने एवं सतत अनुसंधान की दिशा में सदैव कार्य करने की प्रेरणा मिली है ।
इस अवसर पर सभागार में एसएमजीआई के डायरेक्टर उमाशंकर शर्मा , नर्सिंग कॉलेज के डायरेक्टर डॉ शशि शेखर त्रिपाठी प्रिंसिपल नर्सिंग कॉलेज डॉ सुनयना अग्रवाल,रजिस्ट्रार गोल्डी सिंह,विनय कुमार चौबे सहित फार्मेसी और नर्सिंग कॉलेज के सैकड़ों छात्र छात्राएं और विभिन्न प्रोफेसर भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने एवं विशेष अवसरों पर वृक्षारोपण करने के साथ किसी भी प्रकार के व्यसन से दूर रहने की सामूहिक शपथ के साथ सम्पन्न हुआ, कार्यक्रम का सफल संचालन छात्र ऋषभ ने किया।
