(प्रेमकुमार शाक्य)
जसवंतनगर/इटावा। क्षेत्र में किसान अब तेजी से पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक, लाभकारी और दीर्घकालिक फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इसी सोच के साथ नगला हुलासी गाँव के साधारण किसान देशराज शाक्य ने अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर क्षेत्र में एक नई दिशा दी है। उनकी मेहनत और तकनीक से तैयार पौधों पर अब फल भी आने लगे हैं, जिससे उनके साथ-साथ अन्य किसानों में भी उत्साह बढ़ा है।
किसान देशराज शाक्य बताते हैं कि उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की शुरुआती कटिंग पास के ही एक किसान से ली थी। लगातार जानकारी जुटाने, उससे संबंधित तरीकों को सीखने और खेत की स्थिति के अनुसार व्यवस्था बनाने के बाद उन्होंने दो अलग-अलग खेतों में खेती का विस्तार किया। पहले खेत में 65 खंभे लगाए गए हैं, वहीं दूसरे खेत में 80 खंभों की मजबूत व्यवस्था तैयार की गई है। हर खंभे के ऊपर पुराना टायर बांधकर पौधे को सहारा दिया जाता है। टायर के ऊपर चढ़कर बेल विस्तार लेती है, वहीं नीचे लगाए गए पौधे को मजबूती से रस्सियों से बांधा जाता है ताकि हवा या बारिश में कोई नुकसान न हो।
ड्रैगन फ्रूट की खासियत यह है कि यह पौधा लगभग दो वर्ष में तैयार हो जाता है और इसके बाद 30 से 35 वर्षों तक लगातार फल देता रहता है। यह लंबी अवधि की आय किसानों के लिए स्थायी आर्थिक साधन बन सकती है। इसके फल करीब साल भर तक मिलते रहते हैं सिर्फ दो से तीन माह का समय ऐसा होता है जब पौधा फल नहीं देता, अन्यथा बारह महीनों में लगभग आठ नौ माह फल मिलता रहता है।
क्षेत्र के किसानों के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट की मांग लगातार बढ़ रही है। यह फल इटावा, कानपुर, आगरा सहित कई शहरों की मंडियों में आसानी से बिक जाता है। बाजार में इसकी कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है, जिससे यह फसल पारंपरिक गेहूँ धान या सब्ज़ियों की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक साबित हो रही है। किसान देशराज शाक्य कहते हैं कि कम जमीन में ज्यादा फायदा मिलना शुरू होगी इसलिए मैंने इसकी खेती बढ़ाने का फैसला लिया है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती में बहुत अधिक मेहनत नहीं लगती, लेकिन नियमित देखभाल ज़रूरी होती है। देशराज बताते हैं कि सामान्य फलदार वृक्षों की तरह ही इसके पौधों को समय समय पर खाद और पानी दिया जाता है। तेज़ गर्मी एवं बरसात के समय पौधे को सहारे की जरूरत अधिक होती है।
कभी-कभार फफूंदी या कीट लगने पर कीटनाशक दवाइयों का उपयोग करना पड़ता है। इसके अलावा कोई विशेष रोग या बड़ी समस्या देखने में नहीं आती।
गाँव के लोग बताते हैं कि देशराज शाक्य ने अपने स्तर पर नई पहल की है और अब उनकी सफलता देखकर आसपास के कई किसान भी ड्रैगन फ्रूट की खेती के प्रति उत्साहित हैं। यह खेती न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार है, बल्कि कम पानी और कम लागत में उच्च उत्पादन देने वाली फसलों की श्रेणी में आती है। ऐसे में यह फसल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
किसान देशराज शाक्य की यह पहल यह साबित करती है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाएँ, जोखिम उठाएँ और आधुनिक फसलों की ओर बढ़ें, तो खेतों से कमाई कई गुना बढ़ सकती है। क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ भी इस प्रकार की फसलों को भविष्य की खेती बताते हैं।
नगला हुलासी के देशराज शाक्य जैसे किसान ग्रामीण क्षेत्र में प्रगतिशील खेती का उदाहरण बनकर उभर रहे हैं और उनके प्रयास से अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिल रही है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदलेगी किसानों की किस्मत
