नई दिल्ली : विश्व हिंदी परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीयता और मानवता के प्रतीक पं. दीनदयाल उपाध्याय पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 21 एवं 22 नवंबर 2025 को विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इस अवसर पर भगवानदास शर्मा “प्रशांत” को हिंदी सेवा के लिए सम्मानित किया गया। उनको यह सम्मान श्री ग्रेबु टेकले, राजदूत इथियोपिया और विश्व हिंदी परिषद के महासचिव विपिन कुमार ने विश्व हिंदी परिषद की ओर से प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र से सम्मानित किया।

इस कार्यक्रम में केसी त्यागी पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ नेता, सुश्री रेखा शर्मा जी राज्यसभा सांसद हरियाणा, दुर्गा शंकर मिश्र पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, प्रो़ सच्चिदानंद मिश्रा भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, संदीप मारवाह जी, महामंडलेश्वर शांतिगिरी जी महाराज, प्रो प्रवीण गर्ग, प्रो बलराम पाणि, प्रो श्रीप्रकाश सिंह, प्रो पीके पुरोहित, प्रो एसके सिंह, डॉ अशोक कुमार भार्गव पूर्व कमिश्नर मध्य प्रदेश, मलखान सिंह एवं मनीष खान प्रसिद्ध अभिनेता मुंबई, नीतू नवगीत लोक गायिका बिहार, वरिष्ठ पत्रकार ऋचा अनुरुद्ध सहित कई गणमान्य लोगों ने हिंदी के प्रचार प्रसार एवं पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। सुश्री सुनैना मोहन राजदूत सूरीनाम जो कि भारतीय मूल की है, ने अपने वक्तव्य में कहा कि कैरेबियन देश सूरीनाम सदैव से भूतकाल, भाषा,भोजन,भेष, भजन और भावना से भारतवर्ष से जुड़ा है। इस अवसर पर डॉ मृदुल कीर्ति, डॉ मधु खन्ना ऑस्ट्रेलिया, डॉ दुर्गा सिंह उदार, कादंबरी शंकर आदेश, अमेरिका डॉ राम पूर्णिमा शर्मा, जापान, डॉ विवेक मणि त्रिपाठी चीन, डॉ ऋतु शर्मा ननंन पांडे, नीदरलैंड, आरत परिख सऊदी अरब, वंदना खुराना लंदन से पधारी तथा हिंदी के प्रचार प्रसार में अपनी भूमिका एवं निस्वार्थ सेवा का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि जब से श्रद्धेय नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने और वह विदेशों में हिंदी में ही भाषण देते है तो इसका प्रभाव है कि विदेशी लोग भी हिंदी को बड़ी संख्या में सीख रहे है। ब्रिटेन में तो अब छोटे बच्चों का हिंदी अनिवार्य विषय है। तथा अमेरिका में दसवीं के बाद हिंदी एक विषय होगा। विदेश से आए सभी आगंतुकों ने हिंदी सम्मेलन में भाग लेकर खुशी जाहिर की। इस अवसर पर विभिन्न विश्व विद्यालयों के शोधार्थियों के शोध और कई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। शिक्षक भगवानदास शर्मा “प्रशांत” ने भी “वसुधैव कुटुंबकम्- संपूर्ण धरती एक परिवार है। पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के विचार” पर शोध पत्र का वाचन किया।
