मैनपुरी।अयोध्या में 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद जब रामलला अपने भव्य महल में विराजे, तो पूरा देश राममय हो गया। जहाँ एक तरफ देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने ध्वज फहराकर अयोध्या में एक नए युग की शुरुआत की, वहीं दूसरी तरफ एक 8 वर्षीय आद्यया नन्ही कलाकार ने अपनी सुरीली आवाज से इस ऐतिहासिक पल को और भी यादगार बना दिया। चर्चित आईपीएस अधिकारी गणेश साहा की लाडली बेटी आद्यया साहा के नए राम भजन ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है।वह अभी कक्षा 3 शिक्षा ग्रहण कर रही है लेकिन जब वह 4 वर्ष की थी तभी संस्कृतिक गीतों में रुचि रखने लगीं थी । जब घर में पूजा पाठ या सांस्कृतिक गीतों की धुन जब आती थी तो उन गीतों को दोहराना एक शौक बन गया था।आद्यया को हिंदी, अंग्रेजी,तेलुगु, संस्कृत भाषा का अच्छा ज्ञान है।छोटी सी उम्र में जहां बच्चे मोबाइल की रील में व्यस्त रहते है वहां ऐसी भी प्रतिभाशाली बच्चियां मौजूद है।
राम काज में नन्ही गिलहरी सा योगदान
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्शों को अपने गीत में पिरोकर आद्या ने जो प्रस्तुति दी है, उसने हर सुनने वाले को मंत्रमुग्ध कर दिया है। आद्या का यह गीत सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी द्वारा अपनी संस्कृति और संस्कारों को दी गई एक संगीतमय श्रद्धांजलि है। सोशल मीडिया पर उनके इस वीडियो को लाखों लोग देख रहे हैं और उनकी गायकी की प्रशंसा कर रहे हैं।
पिता खाकी में कड़क, तो बेटी सुरों में सौम्य
इस सफलता की खास बात यह है कि आद्यया एक ऐसे परिवार से आती हैं जहाँ अनुशासन और कानून का राज है। उनके पिता, आईपीएस गणेश साहा, पुलिस महकमे में अपनी ईमानदारी और सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। जहाँ पिता अपनी ईमानदारी से देश सेवा में कोई जवाब नहीं छोड़ते, वहीं बेटी आद्यया कला के क्षेत्र में कामयाबी का नया खिताब लिख रही हैं। पिता और बेटी की यह जोड़ी समाज के लिए एक अनूठी मिसाल बन गई है।
सैकड़ों गीतों का सफर तय करना है लक्ष्य
यह पहली बार नहीं है जब आद्यया ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इससे पहले भी वह ऐसे गीतों के माध्यम से सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। लेकिन अयोध्या के इस पावन अवसर पर गाए गए उनके गीत ने ‘आदर्श का एक नया अध्याय’ लिखा है।
नेटिजन्स का कहना है कि जहाँ 500 साल बाद अयोध्या में कमाल हुआ है, वहीं आईपीएस की बेटी के इस गीत ने रामभक्तों के उत्साह को दोगुना कर धमाल मचा दिया है। आद्या की यह उपलब्धि साबित करती है कि संस्कार और संगीत का संगम ही भारतीय संस्कृति की असली पहचान है।
