विजयेंद्र तिमोरी
भरथना,इटावा। पटना से आनंद विहार जा रही स्पेशल ट्रेन में महिला की मौत के बाद रेलवे सुरक्षा को घेरे में लेने वाली मुख्य घटना के साथ ही एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। दर्दनाक घटना के तुरंत बाद सूचना मिलने पर भी जिम्मेदार अफसरों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। जीआरपी और सिविल पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबा विवाद चलता रहा। जिसकी वजह से कार्रवाई में देरी हुई।
बुधवार सुबह घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी और सिविल पुलिस दोनों मौके पर पहुंचीं,लेकिन यह तय करने में विवाद शुरू हो गया कि घटना क्षेत्र किसके अधिकार क्षेत्र में आता है। करीब एक घंटे तक सीमा विवाद चलता रहा। इस बीच मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के बाद शव रेलवे ट्रैक के किनारे काफी देर तक पड़ा रहा। आखिरकार सिविल पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को लोडर से पोस्टमार्टम हाउस भेजा। इसके बाद भी महिला की शिनाख्त को लेकर लापरवाही बरती गई। महिला जिस कोच में बैठी थी उसके सामान की भी कोई जानकारी नहीं ली गई। प्राथमिक जांच में पता चला आरती यादव नाम की यह महिला कानपुर देहात के पखरायां की रहने वाली है और दवा लेने दिल्ली जा रही थी। महिला के कूदने की सूचना प्रयागराज मंडल कार्यालय को मिली, इसके बाद अधिकारी हरकत में आये और ट्रेन को दादरी में रोककर जांच पड़ताल की गई।
कोच के यात्रियों से लिये गये अलग-अलग बयान
हादसे की जानकारी रेलवे के अधिकारियों को मिली तो हड़कंप मच गया। ट्रेन को दादरी स्टेशन पर रोक दिया गया। रेलवे के सूत्र बताते हैं कि दादरी में रेलवे आरपीएफ,जीआरपी और टीटीई टीम ने कोच एस-11 को अलग से जांच के लिए घेर लिया। कोच में मौजूद टीटीई से लिए गए बयान के अलावा करीब 50 यात्रियों से भी पूछताछ की गई। दादरी में जांच के दौरान कोच की वीडियो रिकॉर्डिंग, यात्रियों के बयान और टीटीई की रिपोर्ट को सुरक्षित किया गया है। घटनास्थल पर मिले ब्लूटूथ, गायब मोबाइल और बैग को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
