इटावा।सिविल लाइन स्थित निचली गंगा नहर सिंचाई विभाग के कार्यालय में सोमवार को लगी भीषण आग कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। इस बात का सनसनीखेज खुलासा कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच के बाद हुआ है। फुटेज में विभाग के ही कर्मचारी आग लगाते हुए कैद हुए हैं। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए विभाग ने दो चौकीदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं मुख्य आरोपी भरत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
साजिश के तहत जलाए गए दस्तावेज
बीते सोमवार (15 दिसंबर) की सुबह करीब 6 बजे सिंचाई विभाग के दफ्तर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया था। शनिवार और रविवार की छुट्टी के कारण दफ्तर बंद था, जिसका फायदा आरोपियों ने उठाया। आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और एक के बाद एक छह कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस अग्निकांड में विभाग का रिकॉर्ड रूम पूरी तरह तबाह हो गया है।
इस आग में 50 साल का इतिहास हुआ राख
अधिकारियों के मुताबिक, आगजनी में पिछले 50 वर्षों से अधिक पुराने महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर राख हो गए हैं। नष्ट हुए रिकॉर्ड में नहर परियोजनाओं, करोड़ों के ठेकों, मरम्मत कार्यों, भूमि अधिग्रहण और नक्शों जैसी बेहद अहम फाइलें शामिल थीं। इतनी पुरानी फाइलों के जलने से विभाग के कई पुराने मामलों और जांचों पर असर पड़ने की आशंका है।
“आग लगने की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें विभाग के पुराने और महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हुए हैं। जांच में कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।”
