रिपोर्ट –अजय बाथम
इटावा। जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मंगलवार को नीति आयोग के विशेषज्ञ ए.के. राठौर ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल के विभिन्न वार्डों और विभागों में कई बड़ी खामियां उजागर हुईं, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने न केवल रजिस्टरों की जांच की, बल्कि मरीजों से सीधे संवाद कर अस्पताल की हकीकत जानी।
नीति आयोग के विशेषज्ञ सबसे पहले जिला अस्पताल के महिला विंग पहुंचे। वहां उन्होंने रेन बसेरा और महिला ओटी (OT) विभाग का सघन निरीक्षण किया। इसके पश्चात उन्होंने 100 शैय्या वार्ड और मेडिसिन विभाग का स्टॉक रजिस्टर खंगाला। महिला टीकाकरण रजिस्टर और पैथोलॉजी स्थित ब्लड बैंक के निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां मौजूद सुविधाओं की गुणवत्ता परखी।

इमरजेंसी में मरीजों से जाना हाल, स्टाफ से की पूछताछ
इमरजेंसी विभाग पहुंचे ए.के. राठौर ने वहां भर्ती मरीजों से बातचीत की और पूछा कि उन्हें दवाइयां व इलाज समय पर मिल रहा है या नहीं। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और फार्मासिस्टों से भी पूछताछ की और उपस्थिति व कार्य रजिस्टर चेक किए। निरीक्षण के दौरान उनके साथ सीएमएस (CMS) प्रतोश शुक्ला भी मौजूद रहे, जिनसे उन्होंने व्यवस्थाओं को लेकर जवाब-तलब किया।
एक्सपायरी दवाओं के मामले पर सख्त रुख

मीडिया से रूबरू होते हुए नीति आयोग विशेषज्ञ ने कहा कि निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां पाई गई हैं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। दो दिन पूर्व इमरजेंसी वार्ड में एक्सपायरी डेट की दवाइयां मिलने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया, “यह गंभीर मामला हमारे संज्ञान में है। इसकी गहनता से जांच कराई जा रही है और दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”

निरीक्षण के अंत में उन्होंने अस्पताल परिसर में खड़ी एम्बुलेंसों का जायजा लिया और उनके चालकों से बातचीत की। उन्होंने चालकों से ड्यूटी के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में पूछा और उन्हें निर्देशित किया कि मरीजों को लाने-ले जाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
