इटावा- पक्की सराय स्थित बड़े इमामबाड़े में शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा निवासी मरहूमा जमीला रिज़वी के चालीसवें पर राहत अक़ील की ओर से मजलिस का आयोजन किया गया।
मजलिस में तक़रीर करते हुए दिल्ली से आये मौलाना सैयद नामदार अब्बास ने कहा कि हक पहुंचाने के लिए पहले हक पर चलना चाहिए। कलमा आसानी से पढ़ा जा सकता है लेकिन किरदार बनाने में पूरी जिंदगी लग जाती है। इमाम हुसैन ने किरदार की बुनियाद पर बुलाया ईमान की बुनियाद पर नहीं। अल्लाह जिन्हें नेमतें देता है उन्हीं से हिसाब भी लेगा। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने इंसान को एक जैसा नही बनाया। इंसान अपने अंगूठे से किसी दूसरे का आधार कार्ड नहीं खोल सकता। अल्लाह ने किसी भी चीज को रिपीट नहीं किया। जब इंसान एक जैसा नहीं तो इंसान रसूल अल्लाह के जैसा कैसे हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इंसान के पास तौबा करने का मौका है, अल्लाह तौबा करने वालों को माफ कर देता है। इंसान को चाहिए कि वो लोगों की मदद करे। अली के चाहने वाले तो लोगों की मुश्किलों को आसान करने वाले होते हैं। मौलाना सैयद नामदार अब्बास ने कहा इमाम मेंहदी को याद करो और उनसे मोहब्बत करो तभी इमाम मोहब्बत करेंगे। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन को दुश्मनों ने मदीने में सुकून से रहने नहीं दिया इसलिये इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ 28 रजब को अपना घर मदीना छोड़ना पड़ा और इमाम हुसैन ने मदीने से कर्बला का सफर शुरू किया।
मजलिस में तसलीम रज़ा, सलीम रज़ा, ज़हूर नक़वी ने सोजख्वानी की और तनवीर हसन, जाफर ईरानी ने पेश ख्वानी की। मौलाना अनवारुल जैदी इमामे जुमा इटावा ने कलाम पेश करते हुए कहा जो करती थीं खुलूस ए क़ल्ब से शह की अज़ादारी नेहा अब वह कनीज़ ए फातिमा ज़हरा है तुर्बत में, सईद आमाल थे सारे तो दिल अपना यह कहता है जमीला रिज़वी होंगी निज़्द ए ज़हरा आप जन्नत में। मजलिस में जफर अब्बास, एस एम हादी, जीशान हुसैन जानू, सलमान हुसैन, साहिल, फैसल, शाबी हुसैन, असद हुसैन, रिजवान अहमद, नईम उद्दीन, फीरोज अंसारी, टीएच रिज़वी, शावेज़ नक़वी, शब्बर अक़ील, शारिक सग़ीर शानू, रानू, शफी अहमद बालक, कामरान खान, निहाल खान सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
