इटावा। लोक निर्माण विभाग (PWD) के विद्युत/यांत्रिक खंड और इससे जुड़े पदों के गुपचुप तरीके से किए जा रहे स्थानांतरण की कार्रवाई ने जिले में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। स्थानीय विधायक और सांसद ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, जबकि विभागीय कर्मचारी भी विरोध में उतर आए हैं।
निजी स्वार्थ के चलते गुपचुप कार्रवाई का
आरोप है कि विद्युत/यांत्रिक खंड के अधिशाषी अभियंता ने अपने निजी स्वार्थ और फायदे के लिए, विभागीय लोगों को बिना किसी पूर्व सूचना या जानकारी दिए, पूरे विभाग और उससे संबंधित पदों के स्थानांतरण की कार्यवाही की गई है।
जब इस गुपचुप कार्रवाई की भनक विभागीय कर्मचारियों को लगी, तो उन्होंने इसकी सूचना तुरंत जनपद के जन प्रतिनिधियों को दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभियंता ने शासन को गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए यह स्थानांतरण की कार्यवाही शुरू करवाई है, जबकि इस संबंध में किसी भी विभागीय अधिकारी या जन प्रतिनिधि से कोई सहमति या वार्ता नहीं की गई थी।
जनप्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पर जताई घोर आपत्ति
जन प्रतिनिधियों ने प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लो०नि०वि०, लखनऊ को लिखे पत्र में इस प्रस्ताव पर घोर आपत्ति व्यक्त की है। उनका कहना है कि 4 जुलाई, 2025 को पुनर्गठन और नवसृजन के संबंध में जो प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, उसके बारे में विभाग के किसी भी अधिकारी ने उनसे कोई जानकारी साझा नहीं की।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यांत्रिक खंड, लो०नि०वि० इटावा को जनपद से स्थानांतरित किए जाने पर उन्हें घोर आपत्ति है।
प्लांट संचालन और कर्मचारियों के भविष्य पर संकट
विरोध का मुख्य कारण इस स्थानांतरण से होने वाले गंभीर परिणाम हैं:
भुगतान की समस्या: खंड के स्थानांतरित हो जाने के बाद अंतर्जनपदीय कोषागार से भुगतान किया जाना संभव नहीं होगा, जिसके कारण विभागीय हॉटमिक्स प्लांट का संचालन रुक जाएगा।
बच्चों की शिक्षा पर असर: वित्तीय वर्ष के मध्य में स्टाफ सहित खंड का स्थानांतरण होने से कर्मचारियों के बच्चों की वर्तमान जिले में जारी शिक्षा बाधित होगी, जो उनके भविष्य के लिए उचित नहीं है।
जीवकोपार्जन पर खतरा: प्लांट, जो इस जनपद में सन् 1990 से कार्यरत है, कई स्थानीय व्यक्तियों के जीवकोपार्जन संविदा कर्मचारियों का एकमात्र साधन है। स्थानांतरण होने से इन सभी का भविष्य अन्धकारमय हो जाएगा।
कर्मचारियों और जन प्रतिनिधियों ने एक सुर में उपरोक्त प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और अग्रिम कार्यवाही को तत्काल स्थगित करने का कष्ट करने की मांग की है।
