इटावा। सर मदनलाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ार्मेसी, इटावा (सर मदनलाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस) के तत्वावधान में तीन दिवसीय वर्चुअल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “नवाचारपूर्ण शिक्षण उपकरण और फ़ार्मेसी शिक्षा में डिजिटल रूपांतरण था”
जिसका उद्देश्य फ़ार्मेसी के शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों सहित डिजिटल टूल्स, और अनुसंधान आधारित शिक्षण दृष्टिकोण से अवगत कराना था, ताकि वे नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ सकें। इस एफडीपी के माध्यम से शिक्षकों में तकनीकी दक्षता, नवाचारपूर्ण सोच और शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक रहे डॉ. विवेक यादव ने कहा कि आज के शिक्षकों को नई नई तकनीकों से लैस करना बेहद ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं निदेशक डॉ. यू. एस. शर्मा ने इस आयोजन को अकादमिक उन्नयन की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेहान उद्दीन ने किया।
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और फ़ार्मेसी संस्थानों से बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों और पेशेवरों ने भाग लिया।
पहले दिन मुख्य वक्ता डॉ. लोकेश देब, “वैज्ञानिक-ई (फार्माकोलॉजी), जैव-संसाधन और सतत विकास संस्थान (आईबीएसडी)”, तदोंग, सिक्किम रहे।
उन्होंने “प्रौद्योगिकी और नवाचार विषय पर अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। दूसरे दिन डॉ. एमदाद हुसैन, एसोसिएट प्रोफेसर, फ़ार्मास्यूटिकल टेक्नोलॉजी विभाग, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने “निराशा से संतुष्टि तक: फार्मेसी पेशे में उद्देश्य की पुनर्खोज” विषय पर अत्यंत प्रेरणादायक विचार रखे।
तीसरे और अंतिम दिन डॉ. विनोद तिवारी, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (बीएचयू), वाराणसी ने “जीतने के लिए लिखना: अकादमिक और वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रभावी प्रकाशन के लिए रणनीतियाँ ” विषय पर अत्यंत उपयोगी व्याख्यान दिया।
उन्होंने वैज्ञानिक लेखन के मूलभूत तत्वों, प्रकाशन नैतिकता, रिसर्च पेपर की संरचना, और उच्च गुणवत्ता वाले शोध को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने की रणनीतियों पर गहन जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. यू. एस. शर्मा ने सभी आमंत्रित वक्ताओं का आभार प्रकट किया, एफडीपी के सभी प्रतिभागियों को ई प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।
