लेखपाल को पूरी रिश्वत न देने पर किसान को पीटा, आरोपी फरार

इटावा। सदर तहसील में गुरुवार दोपहर करीब दो बजे दो बीघा जमीन की पैमाइश को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया, दो साल से दो बीघा जमीन की पैमाईश को लेकर चक्कर काट रहे इटावा के खुड़ीसर गांव के किसान शमसुद्दीन पुत्र शरीफ ने लेखपालों पर पचास हजार रुपये की रिश्वत मांगने और इनकार करने पर कमरे में बंद कर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया। शिकायत लेकर पहुंचे किसान ने गुस्से में आकर एसडीएम सदर की गाड़ी के सामने धरना दे दिया, जिससे तहसील परिसर में भारी हंगामा मच गया। पीड़ित शमसुद्दीन ने बताया कि वह अपनी जमीन की पैमाइश के लिए लंबे समय से तहसील के चक्कर लगा रहा था। इसके लिए उसने लेखपाल नागेंद्र सिंह को प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप है कि पैमाइश करने के लिए लेखपाल ने उससे पचास हजार रुपये की मांग की और कई बार दबाव भी बनाया। शमसुद्दीन का कहना है कि वह इतनी बड़ी रकम देने में सक्षम नहीं था, इसलिए उसने रिश्वत देने से साफ इनकार कर दिया। इसी इनकार से नाराज लेखपालों ने गुरुवार दोपहर उसे तहसील में बुलाया। शमसुद्दीन के मुताबिक जैसे ही वह तहसील के कमरे में पहुंचा, लेखपाल नागेंद्र सिंह के साथ मौजूद वेदराम और सुरेश ने दरवाजा बंद कर दिया और उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। तीनों ने मिलकर उससे गाली-गलौज की और रिश्वत देने से इनकार करने पर लात-घूसों से मारना शुरू कर दिया। किसान किसी तरह खुद को बचाते हुए कमरे से बाहर निकला और सीधे एसडीएम की गाड़ी के सामने जाकर बैठ गया। धरने की सूचना मिलते ही तहसील परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसान की पुकार सुनकर कई कर्मचारी और ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। स्थिति बिगड़ती देख एसडीएम सदर विक्रम सिंह राघव और तहसीलदार ने पीड़ित किसान को बुलाकर उसकी बात सुनी। दोनों अधिकारियों ने मामले की जांच तहसीलदार को सौंपने और जांच रिपोर्ट आने पर संबंधित लेखपालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसान ने धरना समाप्त किया। पीड़ित शमसुद्दीन ने कहा कि वह सिर्फ इंसाफ चाहता है और आरोपित लेखपालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होना ज़रूरी है, क्योंकि रिश्वत न देने पर सरकारी कर्मचारी का इस तरह किसान को कमरे में बंद कर पीटना बेहद शर्मनाक और अवैध है। तहसील परिसर में हुई इस घटना को लेकर ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी व्याप्त है और वे जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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