इटावा।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरा होने पर संस्कार भारती इटावा के तत्वावधान में नारायण कॉलेज के टैगोर ऑडिटोरियम में संघ गंगा के तीन भगीरथ नाट्य का मंचन किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि माननीय डॉ इन्द्रेश कुमार जी सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विशिष्ट अतिथि इंजी. हर किशोर तिवारी द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं संस्कार भारती के ध्येय गीत के साथ किया गया। इटावा विभाग प्रचारक यशवीर जी,कार्यक्रम संयोजक डॉ राजेश किशोर त्रिपाठी और अध्यक्ष कुलदीप अवस्थी ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

नाटक का प्रारंभ केशव के शिक्षक नाना जी बझे द्वारा उसकी छोटी-छोटी शरारतों और छत्रपति शिवाजी महाराज के पदचिह्नों पर चलने की उसकी प्रबल इच्छा का उल्लेख उसके माता-पिता से करते हैं। सामाजिक चेतना जगाने वाले संवादों से नाटक धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। केशव ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में, परंतु दृढ़ निश्चय के साथ कलकत्ता जाकर डॉक्टर बनने , उनके क्रांतिकारी विचार, जातिवाद पर उनके स्पष्ट मत, और संघ के कार्य में अंतर की स्पष्टता – इन सबका सुंदर चित्रण किया गया है।

नाटक में दो प्रसंगों को जोड़ने के लिए भारत माता की मधुर वाणी में प्रस्तुत प्रस्तावना दर्शकों को मंत्रमुग्ध करती है। मीनल मुंडले का भारत माता की भूमिका में अभिनय सभी को मंत्र मुग्ध कर रहा था। इतने सीमित समय में संघ के पहले तीन सरसंघचालकों का कार्य, उनका नेतृत्व, नेतृत्व का हस्तांतरण, उससे जुड़ा इतिहास और जीवन चरित्र मंच पर नाटक ने सफलतापूर्वक निभाया है,
सरदार वल्लभभाई पटेल और प.पू. श्री गुरुजी के बीच संवाद, कश्मीर का भारत में विलय, संघ पर लगा प्रतिबंध – ये सब भारत माता के रूप में सूत्रधारिका की कोमल, किंतु ठोस वाणी में सहजता से प्रस्तुत होते हैं। वंदे मातरम् का गगनभेदी उद्घघोष, भगवा ध्वज और संघ घोष की लय – इन सबका अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

बाळासाहेब देवरस का तीसरे सरसंघचालक के रूप में चयन, 1975 की आपातकाल की पृष्ठभूमि, उसके विरोध में हुए सत्याग्रह, मीसा बंदी, रामजन्मभूमि आंदोलन – ऐसे अनेक प्रसंग 1889 से 1996 तक की कालावधि के दृश्य प्रस्तुत किए गए।
नाटक के शीर्षक में “संघगंगा” शब्द प्रयोग अत्यंत सार्थक है। इन तीन भगीरथों ने जो प्रवाह आरंभ किया, वह आज शताब्दी मना रहा है। यह संघगंगा निरंतर कार्यों के रूप में बह रही है और अनंत काल तक बहती रहेगी – यह भावना नाटक ने दर्शकों तक प्रभावी रूप से पहुँचाई ।

इटावा विभाग संघचालक विनोद चंद्र पाण्डेय ने कहा कि शताब्दी वर्ष में संघ के प्रथम तीन सरसंघचालकों के जीवन कार्य को जीवंत मंच पर देखना, हम स्वयंसेवकों के लिए सौभाग्य का विषय है। नाटक के लेखक श्रीधर गाडके, निर्देशक संजय पेंडसे, नेपथ्य सतीश पेंडसे , संगीत डॉ भाग्यश्री और सहयोग अत्रि दीक्षित प्रान्तीय मंत्री, अनुराग चौधरी का रहा।
समापन पर नाटक के कलाकारों का सम्मान रामनरेश शर्मा ( सह विभाग संघचालक) प्रदीप भदौरिया (सह प्रांत कार्यवाह) यशवीर जी विभाग प्रचारक शिवम् ( जिला प्रचारक) जुगेश ( नगर प्रचारक) संयोजक प्रो. राजेश किशोर त्रिपाठी , कुलदीप कुमार मिश्रा, गोपाल मोहन तिवारी इन्द्र नारायण पांडेय ,सौरभ सक्सेना ,महेश तिवारी , कमला कांत त्रिपाठी एवं नमिता तिवारी जी द्वारा किया गया कार्यक्रम में इटावा के प्रतिष्ठित एवं गणमान्य प्रबुद्ध जनों की उत्साही सहभागिता और उपस्थिति सराहनीय रही , कार्यक्रम का संचालन नमिता तिवारी द्वारा किया गया ।
