इटावा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), इटावा के मध्यस्थता केंद्र में प्रभावी मध्यस्थता के माध्यम से करीब 5 वर्षों से चले आ रहे दांपत्य विवाद का सफलतापूर्वक समाधान कराया गया। लंबे समय से चले आ रहे विवाद को लेकर न्यायालय पहुंचे पति-पत्नी ने मध्यस्थता के दौरान एक-दूसरे की बात सुनी और अंततः आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का निर्णय लिया।
प्रकरण वाद संख्या 446/2026, अखिलेश कुमार बनाम शिवानी, अंतर्गत धारा 13 हिंदू विवाह अधिनियम से संबंधित था। विवाह 05 जून 2021 को हुआ था। वैवाहिक जीवन में विवाद उत्पन्न होने के बाद दोनों के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे और दोनों अलग-अलग रह रहे थे। प्रकरण को प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, इटावा द्वारा मध्यस्थता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्थता केंद्र भेजा गया था। गुरूवार 03 सितंबर 2026 को मध्यस्थता केंद्र में दोनों पक्षों की उपस्थिति में मध्यस्थता कराई गई। मध्यस्थता अधिवक्ता राजेश कुमार द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) की पूर्णकालिक सचिव श्रीमती आरती द्विवेदी के निर्देशानुसार दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद के कारणों को समझा गया और आपसी सहमति से समाधान का प्रयास किया गया। मध्यस्थता के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से लिखित सेटेलमेंट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर अपने विवाद का समाधान स्वीकार किया।
मामले में पति की ओर से बताया गया कि विवाह के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच वैचारिक एवं पारिवारिक मतभेद उत्पन्न हो गए थे। वहीं पत्नी की ओर से भी वैवाहिक संबंधों से जुड़ी अपनी शिकायतें न्यायालय के समक्ष रखी गई थीं। विवाद बढ़ने के बाद दोनों के बीच साथ रहना मुश्किल हो गया और मामला न्यायालय तक पहुंच गया। मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि उनके बीच कोई दुराव-संधि नहीं है और दोनों ने आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध विच्छेद के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया को समाप्त करने पर सहमति जताई। समझौते में यह भी तय हुआ कि दोनों पक्ष भविष्य में एक-दूसरे की चल-अचल संपत्ति पर किसी प्रकार का दावा नहीं करेंगे और अपने-अपने जीवन को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाएंगे।
समझौते में दोनों पक्षों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बीच किसी प्रकार का लेन-देन शेष नहीं है और वे समझौते की शर्तों का पालन करेंगे। इस प्रकार, लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद को बिना अनावश्यक मुकदमेबाजी आगे बढ़ाए, संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से समाप्त किया गया।
‘ डालसा ‘ की मध्यस्थता से हुए इस समाधान ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि पारिवारिक विवादों में बातचीत, समझाइश और मध्यस्थता के माध्यम से पक्षकारों को उनके विवाद का शांतिपूर्ण और सहमति-आधारित समाधान दिलाया जा सकता है। यह प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, इटावा की मध्यस्थता व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय सफलता के रूप में सामने आया है।
