(प्रेम कुमार शाक्य)
जसवंतनगर/इटावा। ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव के तहत शनिवार देर शाम रामलीला मैदान में अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। क्षेत्रीय विधायक एवं सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
इस दौरान सपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने विशाल पुष्पमाला पहनाकर उनका स्वागत किया। देशभर से आए कवियों की हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, वीर रस और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं पर देर रात तक तालियां गूंजती रहीं।
शुभारंभ के बाद शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जसवंतनगर की जनता से उनका विशेष लगाव रहा है। यही कारण है कि वह यहां के आयोजनों में निरंतर शामिल होते रहे हैं। एक माह तक चलने वाले रामलीला महोत्सव में वह तीसरी बार आए हैं। यहां के रामलीला मैदान में अयोध्या, पंचवटी और लंका भी मौजूद हैं।
कवयित्री मुमताज नसीम ने मां शारदे की वंदना के साथ कवि सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। मेरठ से आईं कवयित्री हिमांशी बाबरा ने अपनी पंक्तियों से श्रोताओं का ध्यान खींचा।
“लोग तो लोग हैं, लोगों की तरह देखते हैं, एक हम उस बच्चे की तरह देखते हैं।”
पलवल से आए कवि विष्णु विराट ने समसामयिक परिस्थितियों पर व्यंग्य करते हुए सुनाया—
“जुगनुओं ने शराब पी ली, अब ये सूरज को गालियां देंगे।”
कवि बिलाल सहारनपुरी ने सामाजिक एकता का संदेश देते हुए कहा—
“पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था, बाद में हिंदू-मुसलमान हुआ करता था।”
प्रेम और रिश्तों की संवेदनाओं ने बांधा समां
प्रसिद्ध गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने प्रेम, रिश्तों और जीवन की संवेदनाओं को अपनी सुरीली आवाज में प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। उनकी पंक्तियों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
“जो हाथ थाम लो, वो फिर न हटने पाए, प्यार की दौलत को कोई न लूटने पाए। जब भी छू लो बुलंदियों को ध्यान ये रखना, जमीं से पांव का रिश्ता न टूटने पाए।”
उन्होंने ‘तुम मेरी कसम तोड़ दो, हम तुम्हारी कसम तोड़ दें’ और रेत पर नाम लिखने से जुड़ी अपनी चर्चित पंक्तियां सुनाकर भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे कवि कुमार मनोज ने व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियों पर चोट करते हुए कहा—
“लहू खामोश है, होठों पे ताला डाल सका है, ये किस सांचे में खुद को आदमी ने ढाल रखा है।”
वीर रस और राष्ट्रभक्ति से भरा माहौल
वीर रस के कवि मयंक विधोलिया ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से माहौल में जोश भर दिया। सोमनाथ मंदिर और रामलला से जुड़ी पंक्तियां सुनाते हुए उन्होंने कहा—
“आपकी काली करतूतों से हर हिंदू का दिल टूटा है, गजनी ने लूटा सोमनाथ को, तुमने रामलला को लूटा है।”
काव्य पाठ के दौरान उन्होंने शिवपाल सिंह यादव की भी जमकर प्रशंसा की।
अलीगढ़ से आईं कवयित्री मुमताज नसीम ने प्रेम और विरह की भावनाओं को अपनी रचनाओं में पिरोते हुए सुनाया—
“कई साल बाद मिले हो तुम, कहां खो गए थे जवाब दो, मेरे आंसुओं को न पोंछो तुम, मेरे आंसुओं का हिसाब दो।”
उज्जैन से आए हास्य कवि दिनेश देशी घी ने अपने अनूठे अंदाज और हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने भारत मां की महिमा का बखान करते हुए कहा—
“बखान करूं क्या भारत मां का, गुणगान करूं क्या भारत मां का, मेरी भारत मां की माटी का अंदाज ही निराला है, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबको अपने आंचल में पाला है।”
कवयित्री प्रीति पांडेय ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत कर भारत की सांस्कृतिक एकता और तिरंगे के प्रति सम्मान को अभिव्यक्त किया।
“मन की सरहद में घूम लेती हूं, इन हवाओं में झूम लेती हूं, याद जब भी तुम्हारी आती है, मैं तिरंगे को चूम लेती हूं।”
देर रात तक तालियों से गूंजता रहा रामलीला मैदान
कवियों की शानदार प्रस्तुतियों पर रामलीला मैदान बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, वीर रस और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम ने कवि सम्मेलन को यादगार बना दिया। कवि कुमार मनोज ने जोशीले अंदाज में संचालन कर कार्यक्रम में समां बांधे रखा।
इस अवसर पर रामलीला समिति के प्रबंधक राजीव गुप्ता बबलू, उपप्रबंधक अजेन्द्र सिंह गौर, सपा नगर अध्यक्ष राहुल गुप्ता, प्रोफेसर बृजेश चंद्र यादव, विधायक प्रतिनिधि विश्वनाथ प्रताप सिंह सोनू यादव, मोना यादव, सुभाष गुप्ता सहित समाजवादी पार्टी के अनेक पदाधिकारी, क्षेत्रीय नेता एवं हजारों की संख्या में श्रोता मौजूद रहे।
