भागवत कथा में गीता के श्लोक का सही अर्थ समझाया, धर्मों के प्रति सम्मान का दिया संदेश

इटावा। शहर के शिव शक्ति दुर्गा मंदिर, शिवा कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान कथा व्यास पूज्य आचार्य महेश चंद्र पांडेय महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के दसवें श्लोक का सही भावार्थ समझाते हुए कहा

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः।
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः॥

कि योगी को एकांत में रहकर मन और इंद्रियों को वश में रखते हुए, सभी प्रकार की कामनाओं और संग्रह की भावना का त्याग कर परमात्मा का चिंतन करना चाहिए। यही भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताए गए योग का वास्तविक स्वरूप है।

आचार्य महेश चंद्र पांडेय ने कहा कि वह पिछले 44 वर्षों से भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कथा कहना प्रारंभ किया तथा काशी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे 18 पुराणों का अध्ययन एवं वाचन करते हैं।
उन्होंने बिना किसी व्यक्तिगत टिप्पणी के कहा कि कुछ लोगों द्वारा गीता के श्लोकों की गलत व्याख्या कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक ग्रंथ का अर्थ उसके वास्तविक संदर्भ में ही समझना चाहिए और किसी को भी भ्रमित नहीं करना चाहिए।
आचार्य श्री ने कहा कि यदि हम किसी धर्म की आरती नहीं कर सकते, तो किसी भी धर्म का अपमान या निंदा करने का भी किसी को अधिकार नहीं है। सभी धर्मों का सम्मान करना ही भारतीय संस्कृति की पहचान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *