सैफई (इटावा) : उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में मीडिया सेल, अधिकृत प्रवक्ता और नोडल अधिकारियों की व्यवस्था होने के बावजूद पत्रकारों को समय पर विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष नहीं मिल पा रहा है। सैफई प्रेस क्लब के अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री बृजेश पाठक तथा प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
सैफई प्रेस क्लब के अध्यक्ष बी.पी. सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई प्रदेश का प्रमुख चिकित्सा एवं शिक्षण संस्थान है। मीडिया और प्रशासन के बीच प्रभावी संवाद के उद्देश्य से मीडिया सेल का गठन किया गया, अधिकृत प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गई तथा पत्रकारों से समन्वय के लिए नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बावजूद समाचारों के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष लेने के लिए कुलसचिव, मीडिया सेल, अधिकृत प्रवक्ता अथवा नोडल अधिकारियों से संपर्क करने पर कई बार फोन रिसीव नहीं किए जाते। व्हाट्सएप संदेशों और लिखित प्रश्नों का भी उत्तर नहीं मिलता। ऐसे में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर समाचार प्रकाशित करना पत्रकारों की मजबूरी बन जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाचार के प्रकाशन से पहले संबंधित पक्ष का मत लेना निष्पक्ष पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है। यदि जिम्मेदार अधिकारी संवाद के लिए उपलब्ध नहीं होंगे तो मीडिया सेल, प्रवक्ताओं और नोडल अधिकारियों की व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। किसी भी सार्वजनिक संस्थान की विश्वसनीयता उसके कार्यों के साथ-साथ पारदर्शी एवं जवाबदेह कार्यप्रणाली से भी तय होती है। समय पर अधिकृत जानकारी उपलब्ध न होने से भ्रम की स्थिति बनती है और संस्थान का पक्ष भी आमजन तक नहीं पहुंच पाता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समय-समय पर अधिकारियों को मीडिया के साथ सकारात्मक संवाद बनाए रखने तथा तथ्यात्मक जानकारी समय पर उपलब्ध कराने पर बल देते रहे हैं। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री तथा प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा से मीडिया संवाद व्यवस्था की समीक्षा कर पत्रकारों को समयबद्ध ढंग से विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष उपलब्ध कराने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
मीडिया सेल, प्रवक्ता और नोडल अधिकारी… फिर भी पत्रकारों को नहीं मिलता जवाब, विश्वविद्यालय की संवाद व्यवस्था पर सवाल
