इटावा,। अखिल भारतीय किसान सभा के 90वें स्थापना दिवस के अवसर पर राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत जनपद इटावा के विभिन्न गांवों में संगठन का झंडा फहराया गया। इस दौरान किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर 27 अप्रैल को इटावा कचहरी पर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई।

कार्यक्रम के दौरान बिजली के निजीकरण, स्मार्ट/प्रीपेड मीटर, मनरेगा की बहाली, अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते, बीज विधेयक को रद्द कराने, बेमौसम वर्षा व ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा, अन्यायपूर्ण भू-अधिग्रहण तथा उत्तर प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
खड़कौली गांव में आयोजित कार्यक्रम में राजेश्वरी देवी एवं वीरेन्द्र सिंह द्वारा झंडारोहण किया गया। इस अवसर पर किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री एवं प्रांतीय महामंत्री मुकुट सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि 11 अप्रैल 1936 को लखनऊ में किसान सभा की स्थापना हुई थी। आज यह संगठन देश के 26 राज्यों, 436 जिलों और 75 हजार गांवों में लगभग 1.70 करोड़ सदस्यों के साथ देश का सबसे बड़ा और पुराना किसान संगठन बन चुका है। उन्होंने बताया कि संगठन ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर जमींदारी उन्मूलन और आजादी के बाद भी किसानों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया है।
मुकुट सिंह ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारें कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसके खिलाफ किसान आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
जिलामंत्री संतोष शाक्य ने बताया कि इटावा में किसान सभा वर्ष 1980 से सक्रिय है। संगठन ने भूमि अधिग्रहण, बिजली निजीकरण, स्मार्ट मीटर, ट्यूबवेल दरों में वृद्धि, एमएसपी, सिंचाई, फसल खरीद, खाद-बीज की कमी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया है। उन्होंने बताया कि जिले के 95 गांवों में कमेटियां गठित हैं, 200 गांवों में संपर्क है और लगभग 25 हजार सदस्य जुड़े हुए हैं, जिसे और विस्तार दिया जाएगा।
कार्यक्रम को पूर्व जिलाध्यक्ष अमर सिंह शाक्य, कोषाध्यक्ष डॉ. शौकीन सिंह, प्रेमशंकर यादव, राजेश्वरी देवी, इंद्रपाल एवं नारायण सिंह सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीरेन्द्र सिंह ने की।
