जनवरी से अब तक सड़क हादसों में 202 मौतें,नाबालिगों के हाथ बाइक-स्कूटी देने पर डीएम सख्त

इटावा। जिले में सड़क हादसों और उनमें होने वाली जनहानि को रोकने के लिए प्रशासन ने अब कार्रवाई के साथ-साथ दुर्घटनाओं के कारणों का डेटा जुटाकर ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट के नवीन सभागार में जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति एवं जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में सड़क हादसों, ब्लैक स्पॉट और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने अभिभावकों से स्पष्ट अपील की कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को स्कूटी या मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यातायात नियमों का पालन कराकर बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

बैठक में सामने आया कि अगस्त माह में सड़क दुर्घटनाओं में 20 लोगों की मौत हुई। इनमें 10 मौतें नेशनल हाईवे, छह एमडीआर और दो एक्सप्रेसवे पर हुईं। वहीं जनवरी 2026 से अब तक जिले में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 202 लोगों की जान जा चुकी है। इन आंकड़ों पर डीएम ने दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों का गहन विश्लेषण कर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए।

14 ब्लैक स्पॉट की फिर होगी पड़ताल

जिले में चिन्हित 14 ब्लैक स्पॉट पर अब तक की गई कार्रवाई की पुनः समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह भी जांचना होगा कि सुधारात्मक कार्रवाई के बाद वहां दोबारा दुर्घटनाएं हुईं या नहीं। दुर्घटना वाले स्थानों पर जरूरत के अनुसार साइन बोर्ड, चेतावनी बोर्ड, स्पीड लिमिट, हेलमेट संबंधी संकेतक और अन्य यातायात संकेतक लगाने को कहा गया।

डीएम ने कहा कि केवल कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। दुर्घटना किस वजह से, किस स्थान पर और किस समय अधिक हो रही है, इसका विश्लेषण कर स्थायी समाधान तलाशना होगा। एनएच और एमडीआर पर होने वाले हादसों का अलग-अलग डेटा तैयार कर कारणों और समय का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए।

हादसों के समय विशेष पुलिस निगरानी

जिलाधिकारी ने कहा कि यदि किसी मार्ग पर किसी निश्चित समय में लगातार दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं तो उसी अवधि में विशेष पुलिस टीम लगाकर निगरानी और चेकिंग कराई जाए। सीओ ट्रैफिक को दुर्घटना वाले स्थानों पर नियमित टोका-टोकी और जागरूकता अभियान चलाने तथा निर्धारित गति सीमा का पालन कराने के निर्देश दिए गए।

एसएसपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने दुर्घटना वाले मार्गों और गांवों को चिन्हित कर विशेष जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। आसपास के दो से चार गांवों के लोगों को एकत्र कर यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा हेलमेट, धीमी गति और शराब पीकर वाहन न चलाने के प्रति जागरूक करने को कहा।

बरसात के बाद सड़कों के गड्ढे भी निशाने पर

बैठक में बरसात के बाद सड़कों पर बने गड्ढों को भी दुर्घटनाओं का संभावित कारण मानते हुए तत्काल चिन्हांकन और मरम्मत के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों को क्षतिग्रस्त सड़कों की सूची बनाकर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने को कहा गया।

बसों में जहरखुरानी रोकने के भी निर्देश

बैठक में बसों में जहरखुरानी की घटनाओं को भी गंभीरता से लिया गया। डीएम ने निर्देश दिए कि बस रवाना होने से पहले चालक या परिचालक उद्घोषणा के माध्यम से यात्रियों को अपरिचित व्यक्ति से खाने-पीने की वस्तु न लेने और अपने सामान के प्रति सतर्क रहने की जानकारी दें। एसएसपी ने भी प्रत्येक बस में यात्रियों को जहरखुरानी से बचाव के उपाय बताए जाने के निर्देश दिए।

स्कूली वाहनों में महिला परिचर अनिवार्य

विद्यालयी बच्चों की सुरक्षा को लेकर डीएम ने सभी विद्यालयों में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का अनिवार्य गठन और पूर्व गठित समितियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए। स्कूली वाहनों के चालकों का पुलिस सत्यापन, चरित्र सत्यापन और मेडिकल फिटनेस सुनिश्चित करने को कहा गया।

डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों को ले जाने वाले प्रत्येक विद्यालयी वाहन में एक परिचर (अटेंडेंट) की मौजूदगी अनिवार्य हो। यदि वाहन में बालिकाओं का परिवहन किया जा रहा है तो महिला परिचर की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

विद्यालय प्रबंधन को वाहनों की फिटनेस, चालक की पात्रता व सत्यापन, परिचर की उपलब्धता और अन्य सुरक्षा मानकों की नियमित जांच कराने को कहा गया। डीएम ने दो टूक कहा कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में आईएएस कोमल पुनिया, सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर, जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल सिंह, एआरटीओ प्रदीप देशमणि, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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